तेहरान/वॉशिंगटन, 15 जून 2026 — अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से हुए एक अस्थायी समझौते का दुनिया भर के देशों और नेताओं ने स्वागत किया है। कई सरकारों ने इसे मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है और इसके बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा, "दुनिया के जहाज अपने इंजन शुरू करें। तेल का प्रवाह फिर से शुरू होने दें।"
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने बताया कि 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान दोनों पक्ष व्यापक समझौते पर बातचीत जारी रखेंगे, जिसमें ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल होंगे।
कतर और पाकिस्तान ने निभाई अहम भूमिका
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान को कूटनीतिक समाधान तलाशने के लिए बधाई दी। उन्होंने कतर, सऊदी अरब और तुर्किये का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने समझौते को संभव बनाने में योगदान दिया।
कतर के विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों की बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। कतर ने उम्मीद जताई कि यह समझौता क्षेत्र में स्थिरता और व्यापक शांति प्रयासों को आगे बढ़ाएगा।
इज़राइल में मिली-जुली प्रतिक्रिया
इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने कहा कि उनका देश लेबनान में अपने कब्जे वाले क्षेत्रों से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान भविष्य में इज़राइल पर हमला करता है तो उसे "कड़ी प्रतिक्रिया" का सामना करना पड़ेगा।
वहीं, इज़राइल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने समझौते की आलोचना करते हुए इसे इज़राइल और "पूरी स्वतंत्र दुनिया" के लिए नुकसानदायक बताया। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान जारी रहना चाहिए ताकि वह कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
खाड़ी देशों और तुर्किये का समर्थन
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और तुर्किये ने समझौते का स्वागत किया और सभी पक्षों से इसकी शर्तों का पूरी तरह पालन करने की अपील की।
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान ने इसे क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि तुर्किये कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर स्थायी समाधान का समर्थन करता रहेगा।
संयुक्त राष्ट्र और यूरोप ने जताई उम्मीद
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने समझौते को संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में "महत्वपूर्ण कदम" बताया।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि अब सबसे बड़ी प्राथमिकता समझौते का पूर्ण और त्वरित क्रियान्वयन है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना किसी शुल्क या बाधा के नौवहन बहाल करने पर जोर दिया।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने समझौते को युद्ध समाप्त करने की दिशा में "बेहद महत्वपूर्ण" बताया और कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और बिना शर्त खोले जाने की मांग की, जबकि जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई गति देने और मध्य पूर्व को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद कर सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच महीनों से जारी संघर्ष ने हजारों लोगों की जान ली है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता आएगी और वैश्विक बाजारों को राहत मिलेगी।
आगे की राह
हालांकि इस समझौते को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी अंतिम सहमति बनना बाकी है। आगामी 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान दोनों पक्ष प्रतिबंधों, सुरक्षा गारंटी और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विषयों पर विस्तृत बातचीत करेंगे।
फिलहाल, दुनिया भर में यह उम्मीद बढ़ी है कि मध्य पूर्व के हालिया संघर्ष का समाधान युद्ध के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए संभव हो सकता है।