मुंबई, भारत — टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी में अपनी नियुक्ति न करने का फैसला जाहिर किया है। इस खबर ने भारत के सबसे बड़े उद्योग समूह को झटका देते हुए लिस्टेड टाटा कंपनियों के शेयरों में तेजी से गिरावट ला दी है।
63 साल के चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा सॉन्स बोर्ड ने उनके पांच साल की एक्सटेंशन पर बहस नहीं कर पाया। प्रस्ताव जून में आया था, लेकिन बोर्ड में कोई सहमति नहीं बनी। चंद्रशेखरन ने ट्वीट में लिखा — “महीनों बाद भी बोर्ड में कोई फैसला नहीं हो सका। अनोनेस समर्थन के अभाव में मैंने फैसला टाल दिया।”
रणनीतिक प्रोजेक्ट पर खतरा
चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा सॉन्स एक बहुत बड़ा संस्थान है। कई महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अब भी चरणबद्ध हैं। “लोगों, निवेशकों, पार्टनरों और स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप में स्पष्टता जरूरी है,” उन्होंने लिखा।
समूह में एयर इंडिया, टाटा स्टील, जैगर लैंड रोवर जैसे दिग्गज हैं। एयर इंडिया को 2022 में सरकारी खरीदने के बाद अब भी नई चुनौतियां हैं।
ट्रस्ट्स का बोर्ड में कब्जा
टाटा ट्रस्ट्स टाटा सॉन्स के 66% मालिक हैं। इस स्ट्रक्चर ने टैक्स और रेगुलेटरी फायदे दिए हैं, लेकिन बोर्डरूम में टेंशन पैदा की है। ट्रस्ट्स के तीन नामित लोग बोर्ड में बैठे हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बोर्डिंग, फंडिंग और टाटा सॉन्स को लिस्ट करने जैसे मुद्दों पर मतभेद चल रहे हैं। समूह ने कोई कमेंट नहीं किया।
पावर स्ट्रगल और पुरानी कहानी
इस फैसले का सीधा असर 2017 के साइरस मिस्ट्रा के अचानक निकाले जाने पर पड़ा था। तब से ट्रस्ट्स और बोर्ड में विरोध बढ़ा है। चंद्रशेखरन 1987 से टाटा परिवार में हैं। पहले TCS के CEO थे, फिर चेयरमैन बने।
मार्केट एनालिस्ट अम्बरिश बलिगा ने कहा, “जब इतना बड़ा नाम इस्तीफा देता है, तो शेयर बाजार रिएक्ट होता है। लेकिन छह महीने में नया चेयरमैन चुन लिया जाएगा। शायद इंनग्रुप से ही आएगा।”
टाटा मोबाइल, टाटा स्टील और अन्य लिस्टेड कंपनियों के शेयर गिर गए। टाटा ग्रुप ने अभी तक सक्सेशन का कोई प्लान नहीं बताया है।
यह कहानी जारी है।